श्री साईबाबांच्या बदनामीकारक व्हिडीओ प्रकरणी दिल्ली उच्च न्यायालयाचे महत्त्वपूर्ण निर्देश
सर्व समाजमाध्यमांवरील आक्षेपार्ह मजकूर हटवण्याबाबत ७ दिवसांत निर्णय घेण्याचे GAC ला आदेश
शिर्डी,
श्री साईबाबा आणि श्री साईबाबा संस्थान विश्वस्तव्यवस्था, शिर्डी यांच्या विरोधात यूट्यूबसह समाजमाध्यमांवर प्रसारित करण्यात येणाऱ्या बदनामीकारक व धार्मिक भावना दुखावणाऱ्या व्हिडीओंच्या प्रकरणी दिल्ली उच्च न्यायालयाने महत्त्वपूर्ण निर्देश दिले आहेत. संस्थानकडून दाखल करण्यात आलेल्या याचिकेवर सुनावणी करताना मा. न्यायमूर्ती डॉ. स्वराणा कांता शर्मा यांच्या खंडपीठाने ग्रीव्हन्स अपिलेट कमिटी (GAC) ला पुढील सात दिवसांत या प्रकरणी कारणासहित निर्णय घेऊन १९ ऑगस्ट २०२६ पर्यंत अहवाल सादर करण्याचे निर्देश दिले आहेत.
या निर्देशांमुळे आक्षेपार्ह व्हिडीओ व मजकूर समाजमाध्यमांवरून हटवण्याच्या संस्थानच्या मागणीवर सक्षम प्राधिकरणाकडून तातडीने निर्णय होण्याचा मार्ग मोकळा झाला आहे. श्री साईबाबांची प्रतिमा, श्री साईबाबा संस्थानची प्रतिष्ठा तसेच देश-विदेशातील कोट्यवधी साईभक्तांच्या श्रद्धा व धार्मिक भावनांचे संरक्षण करण्यासाठी संस्थानचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गाडीलकर (भा.प्र.से.) यांच्या मार्गदर्शनाखाली या प्रकरणी कायदेशीर पाठपुरावा करण्यात आला. यूट्यूबकडे जुलै २०२६ मध्ये वारंवार तक्रारी करूनही अपेक्षित कार्यवाही न झाल्यानंतर हे प्रकरण इलेक्ट्रॉनिक्स व माहिती तंत्रज्ञान मंत्रालय तसेच GAC समोर मांडण्यात आले. त्यानंतर संस्थानने दिल्ली उच्च न्यायालयात दाद मागितली. सुनावणीदरम्यान न्यायालयाने भाविकांच्या धार्मिक श्रद्धा व भावना यांचे महत्त्व अधोरेखित केले असून, अशा प्रकारच्या आक्षेपार्ह सामग्रीमुळे भारतीय राज्यघटनेच्या कलम २५ अंतर्गत संरक्षित धार्मिक स्वातंत्र्याच्या अधिकारांशी संबंधित प्रश्न निर्माण होत असल्याचे निरीक्षण नोंदविले.
संस्थानच्या वतीने ज्येष्ठ वकील प्रमोद कुमार दुबे यांच्यासह सौरव अग्रवाल, रवी शर्मा, प्राची दुबे, रूपराज बॅनर्जी, सत्यम शर्मा, हर्ष खबर, आर्यन कुमार तिवारी, अनुषा सिन्हा, खुशी अरोरा आणि शंभू प्रसाद सिंग यांनी न्यायालयासमोर संस्थानची बाजू मांडली. केंद्र सरकारच्या वतीने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा आणि मुख्य वकील विजय जोशी उपस्थित होते.
श्री साईबाबा संस्थानचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गाडीलकर यांच्या मार्गदर्शनाखाली संस्थानने या प्रकरणाचा सातत्याने आणि प्रभावीपणे कायदेशीर पाठपुरावा केला. श्री साईबाबांच्या पवित्र प्रतिमेचा अवमान होऊ नये आणि कोट्यवधी साईभक्तांच्या श्रद्धेचे संरक्षण व्हावे, या भूमिकेतून संस्थानने घेतलेल्या ठाम भूमिकेला या न्यायालयीन निर्देशांमुळे महत्त्वपूर्ण बळ मिळाले आहे.
या निर्देशांनंतर श्री साईबाबा संस्थानचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गाडीलकर म्हणाले -
“साईभक्तांच्या धार्मिक भावना, श्रद्धा आणि श्रीसाईबाबांच्या पवित्र प्रतिमेचा सन्मान राखणे तसेच संस्थानच्या प्रतिष्ठेचे संरक्षण करणे ही आमची सर्वोच्च प्राथमिकता आहे. मा. दिल्ली उच्च न्यायालयाने दिलेल्या निर्देशांचे आम्ही स्वागत करतो. GAC कडून या प्रकरणी सात दिवसांत कारणासहित निर्णय अपेक्षित असून, आक्षेपार्ह व बदनामीकारक सामग्रीबाबत योग्य ती कार्यवाही होईल, असा आम्हाला विश्वास आहे.”
Delhi High Court's Significant Directives in Defamatory Video Case Concerning Shri Saibaba GAC ordered to decide within 7 days on removing objectionable content across all social media platforms
Shirdi, The Delhi High Court has issued significant directives regarding a case involving defamatory videos circulating on YouTube and other social media platforms that hurt religious sentiments against Shri Saibaba and the Shri Saibaba Sansthan Trust, Shirdi. While hearing a petition filed by the Sansthan, the bench of Hon'ble Justice Dr. Swarana Kanta Sharma directed the Grievance Appellate Committee (GAC) to issue a reasoned decision within the next seven days and submit a report by August 19, 2026.
These directives clear the way for prompt action by the competent authority regarding the Sansthan's demand to remove objectionable videos and content from social media platforms. Under the guidance of Goraksha Gadilkar (IAS), Chief Executive Officer of the Sansthan, legal follow-ups were pursued to protect the image of Shri Saibaba, the reputation of the Sansthan, and the faith and religious sentiments of millions of Saibaba devotees worldwide. Despite repeated complaints to YouTube in July 2026, no satisfactory action was taken, leading the Sansthan to present the matter before the Ministry of Electronics and Information Technology and the GAC, before ultimately seeking relief from the Delhi High Court. During the hearing, the court underscored the importance of devotees' religious sentiments and observed that such objectionable content raises questions regarding the right to freedom of religion protected under Article 25 of the Constitution of India.
Senior Advocate Pramod Kumar Dubey, along with Saurav Agrawal, Ravi Sharma, Prachi Dubey, Roopraj Banerjee, Satyam Sharma, Harsh Khabar, Aryan Kumar Tiwari, Anusha Sinha, Khushi Arora, and Shambhu Prasad Singh, represented the Sansthan. Additional Solicitor General Chetan Sharma and Lead Counsel Vijay Joshi appeared on behalf of the Central Government.
Under the guidance of CEO Goraksha Gadilkar, the Sansthan consistently and effectively pursued this legal matter. These court directions have provided significant support to the firm stand taken by the Sansthan to prevent the desecration of Shri Saibaba’s sacred image and to safeguard the devotion of millions of followers.
Following these directives, Goraksha Gadilkar, Chief Executive Officer of Shri Saibaba Sansthan, stated: "Upholding the religious sentiments, faith of Saibaba devotees, the dignity of Shri Saibaba’s sacred image, and protecting the reputation of the Sansthan is our top priority. We welcome the directions issued by the Hon'ble Delhi High Court. A reasoned decision from the GAC is expected within seven days, and we are confident that appropriate action will be taken regarding the objectionable and defamatory content."
श्री साईबाबा के मानहानिकारक वीडियो मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्देश सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने पर 7 दिनों के भीतर निर्णय लेने का GAC को आदेश
शिर्डी, श्री साईबाबा और श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिर्डी के खिलाफ यूट्यूब सहित सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे मानहानिकारक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले वीडियो के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। संस्थान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति डॉ. स्वर्ण कांत शर्मा की पीठ ने शिकायत अपीलीय समिति (GAC) को अगले सात दिनों के भीतर इस मामले में कारण सहित निर्णय लेने और 19 अगस्त 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
इन निर्देशों से सोशल मीडिया से आपत्तिजनक वीडियो और सामग्री को हटाने की संस्थान की मांग पर सक्षम प्राधिकरण द्वारा त्वरित निर्णय लेने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। श्री साईबाबा की छवि, श्री साईबाबा संस्थान की प्रतिष्ठा और देश-विदेश के करोड़ों साईं भक्तों की आस्था व धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गडीलकर (भा.प्र.से.) के मार्गदर्शन में इस मामले की कानूनी पैरवी की गई। यूट्यूब को जुलाई 2026 में बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई न होने पर, इस मामले को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा GAC के समक्ष रखा गया। इसके बाद संस्थान ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने भक्तों की धार्मिक आस्था और भावनाओं के महत्व को रेखांकित किया और टिप्पणी की कि इस प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़े सवाल उठते हैं।
संस्थान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार दुबे के साथ सौरव अग्रवाल, रवि शर्मा, प्राची दुबे, रूपराज बनर्जी, सत्यम शर्मा, हर्ष खबर, आर्यन कुमार तिवारी, अनुषा सिन्हा, खुशी अरोड़ा और शंभू प्रसाद सिंह ने अदालत में पक्ष रखा। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और मुख्य वकील विजय जोशी उपस्थित हुए।
श्री साईबाबा संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गडीलकर के मार्गदर्शन में संस्थान ने इस मामले की लगातार और प्रभावी कानूनी पैरवी की। श्री साईबाबा की पवित्र छवि का अनादर न हो और करोड़ों साईं भक्तों की आस्था सुरक्षित रहे, इस उद्देश्य से संस्थान द्वारा लिए गए दृढ़ रुख को इन अदालती निर्देशों से महत्वपूर्ण बल मिला है।
इन निर्देशों के बाद श्री साईबाबा संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गडीलकर ने कहा: "साईं भक्तों की धार्मिक भावनाएं, आस्था और श्री साईबाबा की पवित्र छवि का सम्मान बनाए रखना तथा संस्थान की प्रतिष्ठा की रक्षा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का स्वागत करते हैं। GAC से इस मामले में सात दिनों के भीतर कारण सहित निर्णय की उम्मीद है, और हमें विश्वास है कि आपत्तिजनक एवं मानहानिकारक सामग्री पर उचित कार्रवाई की जाएगी।"