शिर्डी, दि. ८ ऑक्टोबर २०२६ : श्री साईबाबांच्या प्रसाद वितरणासाठी पर्यावरणपूरक ज्यूट पिशव्यांचा वापर करण्यात यावा, या उद्देशाने राष्ट्रीय ज्यूट बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार यांच्या वतीने श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिर्डीला ५,००० ज्यूट पिशव्या विनामुल्य स्वरूपात उपलब्ध करून देण्यात येणार आहेत. त्यापैकी १,००० ज्यूट पिशव्या आज गुरुवार, दि. ८ ऑक्टोबर २०२६ रोजी संस्थानकडे सुपूर्द करण्यात आल्या.
या निमित्ताने राष्ट्रीय ज्यूट बोर्डाचे सचिव व मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री. शशी भूषण सिंह आणि श्री साईबाबा संस्थानचे, मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री. गोरक्ष गाडिलकर, भा.प्र.से. यांच्या उपस्थितीत पाच साई भक्तांना या ज्यूट पिशव्यांचे वितरण करत उपक्रमाचा शुभारंभ करण्यात आला. यावेळी राष्ट्रीय ज्यूट बोर्डाच्या मार्केट प्रमोशन विभागाचे संयुक्त संचालक व प्रमुख श्री. किशन सिंह घुघत्याल तसेच श्री साईबाबा संस्थानचे प्रशासकिय अधिकारी संदीपकुमार भोसले उपस्थित होते.
श्री साईबाबा मंदिरात देश-विदेशातून मोठ्या संख्येने भाविक दर्शनासाठी येतात. भाविकांना प्रसाद वितरणासाठी पर्यावरणपूरक ज्यूट पिशव्यांचा वापर केल्यास पर्यावरण संवर्धनाला हातभार लागण्याबरोबरच भाविकांमध्येही पर्यावरणपूरक जीवनशैलीचा संदेश पोहोचण्यास मदत होणार आहे.
या संदर्भात दि. १० जुलै २०२६ रोजी राष्ट्रीय ज्यूट बोर्ड आणि श्री साईबाबा संस्थान यांच्यात झालेल्या बैठकीत श्री साईबाबांचा प्रसाद वितरणासाठी पर्यावरणपूरक व शाश्वत ज्यूट पिशव्यांच्या वापराबाबत चर्चा झाली होती. त्यानंतर या वापरासाठी राष्ट्रीय ज्यूट बोर्डाने ५,००० ज्यूट पिशव्या विनामुल्य स्वरूपात उपलब्ध करून देण्याची तयारी दर्शविली.
ज्यूट हा नैसर्गिक, नूतनीकरणक्षम आणि जैवविघटनशील तंतू असल्याने पारंपरिक कृत्रिम व एकदाच वापरल्या जाणाऱ्या पॅकेजिंग साहित्याला तो पर्यावरणपूरक पर्याय ठरू शकतो. प्रसाद घेऊन गेल्यानंतर भाविक या पिशव्यांचा घरगुती कामांसाठीही पुनर्वापर करू शकतात.
या माध्यमातून शिर्डीत येणाऱ्या भाविक, प्रसाद विक्रेते आणि नागरिकांमध्ये पर्यावरणपूरक पॅकेजिंगचा वापर व पुनर्वापर याबाबत जनजागृती होण्यास मदत होणार आहे. तसेच या पायलट उपक्रमाच्या माध्यमातून ज्यूट पिशव्यांचा प्रत्यक्ष वापर आणि त्याबाबतचा प्रतिसाद जाणून घेण्यास मदत होणार आहे.
राष्ट्रीय ज्यूट बोर्डाकडून उपलब्ध करून देण्यात येणाऱ्या ५,००० ज्यूट पिशव्यांपैकी १,००० पिशव्या आज संस्थानकडे सुपूर्द करण्यात आल्या असून, उर्वरित पिशव्या पुढील टप्प्यात उपलब्ध करून देण्यात येणार आहेत.
शिरडी, दिनांक ८ अक्टूबर २०२६: श्री साईबाबा के प्रसाद वितरण के लिए पर्यावरण अनुकूल (इको-फ्रेंडली) जूट की थैलियों का उपयोग करने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय जूट बोर्ड, कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी को ५,००० जूट की थैलियां निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें से १,००० जूट की थैलियां आज गुरुवार, दिनांक ८ अक्टूबर २०२६ को संस्थान को सौंप दी गईं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय जूट बोर्ड के सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री शशी भूषण सिंह और श्री साईबाबा संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री गोरक्ष गाडिलकर (भा.प्र.से.) की उपस्थिति में पांच साईं भक्तों को ये जूट की थैलियां वितरित कर इस पहल की शुरुआत की गई। इस दौरान राष्ट्रीय जूट बोर्ड के बाजार संवर्धन विभाग के संयुक्त निदेशक एवं प्रमुख श्री किशन सिंह घुघत्याल तथा श्री साईबाबा संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी संदीपकुमार भोसले उपस्थित थे।
श्री साईबाबा मंदिर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। प्रसाद वितरण के लिए पर्यावरण अनुकूल जूट की थैलियों के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिलने के साथ-साथ भक्तों तक पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली का संदेश पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
इस संबंध में १० जुलाई २०२६ को राष्ट्रीय जूट बोर्ड और श्री साईबाबा संस्थान के बीच हुई बैठक में श्री साईबाबा के प्रसाद वितरण हेतु पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ जूट की थैलियों के उपयोग पर चर्चा हुई थी। इसके बाद राष्ट्रीय जूट बोर्ड ने इस उद्देश्य के लिए ५,००० जूट की थैलियां निःशुल्क उपलब्ध कराने की सहमति व्यक्त की थी।
जूट एक प्राकृतिक, नवीकरणीय और जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रेडेबल) रेशा है, इसलिए यह पारंपरिक कृत्रिम और एकल-उपयोग (सिंगल-यूज) पैकेजिंग सामग्री का एक पर्यावरण अनुकूल विकल्प साबित हो सकता है। प्रसाद ले जाने के बाद श्रद्धालु इन थैलियों का घरेलू कार्यों में भी पुनः उपयोग कर सकते हैं।
इस माध्यम से शिरडी आने वाले श्रद्धालुओं, प्रसाद विक्रेताओं और नागरिकों में पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग के उपयोग और पुनर्चक्रण को लेकर जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से जूट की थैलियों के वास्तविक उपयोग और इस पर मिलने वाली प्रतिक्रिया को समझने में भी सहायता मिलेगी।
राष्ट्रीय जूट बोर्ड द्वारा प्रदान की जाने वाली ५,००० जूट की थैलियों में से १,००० थैलियां आज संस्थान को सौंप दी गई हैं, जबकि शेष थैलियां अगले चरण में उपलब्ध कराई जाएंगी।
Shirdi, October 8, 2026: With the aim of promoting eco-friendly jute bags for the distribution of Shri Saibaba's Prasad, the National Jute Board, Ministry of Textiles, Government of India, will provide 5,000 jute bags free of cost to the Shri Saibaba Sansthan Trust, Shirdi. Out of these, 1,000 jute bags were handed over to the Sansthan today, Thursday, October 8, 2026.
The initiative was inaugurated by distributing these jute bags to five Sai devotees in the presence of Mr. Shashi Bhushan Singh, Secretary and Chief Executive Officer of the National Jute Board, and Mr. Goraksha Gadilkar, IAS, Chief Executive Officer of Shri Saibaba Sansthan. Mr. Kishan Singh Ghughtyal, Joint Director and Head of the Market Promotion Division of the National Jute Board, along with Sandipkumar Bhosle, Administrative Officer of Shri Saibaba Sansthan, were also present on the occasion.
Devotees from across India and abroad visit the Shri Saibaba Temple in large numbers. Using eco-friendly jute bags for Prasad distribution will not only contribute to environmental conservation but also help spread the message of a sustainable lifestyle among devotees.
Earlier, on July 10, 2026, a meeting between the National Jute Board and Shri Saibaba Sansthan discussed the use of sustainable, eco-friendly jute bags for Prasad packaging. Following this, the National Jute Board agreed to provide 5,000 jute bags free of cost for the purpose.
As jute is a natural, renewable, and biodegradable fiber, it serves as an eco-friendly alternative to conventional synthetic and single-use packaging materials. After carrying the Prasad, devotees can also reuse these bags for household chores.
This initiative will help create awareness among visiting devotees, Prasad vendors, and local citizens regarding the adoption and reuse of eco-friendly packaging. Furthermore, this pilot project will help assess the practical usage and gather public feedback regarding the bags.
Out of the 5,000 jute bags committed by the National Jute Board, 1,000 bags were handed over to the Sansthan today, while the remaining bags will be supplied in the next phase.



